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Tuesday, 18 March 2014

Anmol Vachan

krishna

Anmol Vachan

दूसरों के हित के लिये किये जाने वाला पाप-कर्म भी पुण्य होता है, और दूसरों के अहित के लिये किये जाने वाला पुण्य-कर्म भी पाप होता है।

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